इस वृक्ष की छाल का उपयोग पारंपरिक अफ्रीकी चिकित्सा में मलेरिया, बुखार, पेट के विकार, गठिया और संक्रमण के उपचार के लिए किया जाता है। इसमें अल्कलॉइड्स पाए जाते हैं, जिनमें जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। छाल का काढ़ा पाचन शक्ति और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपयोग किया जाता है। अधिक मात्रा में सेवन विषाक्त हो सकता है, इसलिए सावधानी आवश्यक है।
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यह अपने कड़वे स्वाद वाली औषधीय छाल के लिए प्रसिद्ध है। सूखा सहनशील होने के कारण यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उग सकता है और स्थानीय जैव विविधता को समर्थन देता है। इसके चमकीले फल पक्षियों को आकर्षित करते हैं, जिससे बीज प्रसार में सहायता मिलती है।
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Strychnos henningsii Gilg
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⚠️ My-Tree is not responsible for misuse. Always consult a qualified professional before using any plant material.
🌱 Story of रेड बिटरबेरी
Strychnos henningsii एक मध्यम आकार का सदाबहार वृक्ष है, जिसकी घनी और गोलाकार छत्राकार शाखाएं तथा चमकदार गहरे हरे पत्ते होते हैं। इसमें छोटे हरे रंग के फूल और गोल फल लगते हैं, जो पकने पर लाल-नारंगी रंग के हो जाते हैं। इसकी गहरी और खुरदरी छाल पारंपरिक चिकित्सा में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। यह वन क्षेत्रों और जंगल की सीमाओं पर अच्छी तरह विकसित होता है।
This tree heals the planet
Every single day, रेड बिटरबेरी gives back
☁️ CO₂ Absorbed
0 kg/yr
≈ 0 km of car emissions offset annually
💨 Oxygen Released
0 kg/yr
💧 Water Conserved
0 L/yr
—
Age
20.0m
Height
80yr
Lifespan
—
Stage
📋 Details
🌿
Family
Loganiaceae
📍
Native Status
—
🏙️
City
Kollam
🗺️
Location
Private Property
🩺 Medicinal Properties
इस वृक्ष की छाल का उपयोग पारंपरिक अफ्रीकी चिकित्सा में मलेरिया, बुखार, पेट के विकार, गठिया और संक्रमण के उपचार के लिए किया जाता है। इसमें अल्कलॉइड्स पाए जाते हैं, जिनमें जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। छाल का काढ़ा पाचन शक्ति और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपयोग किया जाता है। अधिक मात्रा में सेवन विषाक्त हो सकता है, इसलिए सावधानी आवश्यक है।
✨ What makes रेड बिटरबेरी special
यह अपने कड़वे स्वाद वाली औषधीय छाल के लिए प्रसिद्ध है। सूखा सहनशील होने के कारण यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उग सकता है और स्थानीय जैव विविधता को समर्थन देता है। इसके चमकीले फल पक्षियों को आकर्षित करते हैं, जिससे बीज प्रसार में सहायता मिलती है।